Thursday, February 19, 2015

आँसू भी ना निकले

औरतों की बिकने की परंपरा कोई नयी नहीं है। जिस देश में मैं रहती हूँ, वहां तो 8-9 साल की लड़कियों से लेकर 17-18 साल की लड़कियां बहुत थोड़े पैसे में बेच दी जाती है।  यहाँ यह कहते हैं की 55 साल के ऊपर का आदमी यदि जवान लड़की के साथ सम्बन्ध बनाये तो वह भी जवान हो जाता है।  इसलिए ज्यादातर हर पुरुष उस उम्र का लड़की खरीदकर, इस्तेमाल करके छोड़ देता है।
माँ बाप को पैसा मिल जाता है।  कहिये की हालात के शिकार हैं, या परंपरा के, परन्तु कुचली तो लड़की ही जाती है।
इन बातों के बारे में सोचते कुछ पंक्तियाँ आई।


चंद पैसो के लिए बेच दी गयी मैं
मेरा इच्छा न पूछी गयी,

भेड़िये के तरह मेरे शरीर को नौचा,
इस्तेमाल कर छोड़ दिया।
मेरी आह और आंसू न देखे किसी ने,
मन का दर्द ना समझा कोई।

मेरा जीवन क्यों हुआ कोई हैवान की वासना का शिकार
अपनी बेटी क्यों न दिखी मुझमें?
धिक्कार ऐसे लोगों को
जो मुझे अपनी वासना का शिकार बनाते हैं।



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